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    NEET एग्जाम पर उठे सवाल, वायरल गेस पेपर से कई प्रश्नों का मिलान

    जयपुर: राजस्थान में नीट (NEET)-2026 परीक्षा के दौरान हुई कथित अनियमितताओं को लेकर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच में मिले तथ्यों ने परीक्षा की सुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

    गेस पेपर और असली प्रश्नपत्र में 'अजीब' समानता

    इस पूरे विवाद की जड़ में एक 'गेस पेपर' है, जो परीक्षा से ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया और छात्रों के बीच तेजी से वायरल हुआ था। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दौरान उस गेस पेपर के लगभग 125 सवाल असली परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। अब SOG इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि यह गेस पेपर किसने तैयार किया और इसे इतने सटीक तरीके से कैसे बनाया गया कि इसके अधिकांश सवाल मुख्य परीक्षा में आ गए।

    SOG की कार्रवाई: सीकर के हॉस्टलों में छापेमारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए SOG की टीमों ने सीकर में डेरा डाल दिया है। यहां के विभिन्न कोचिंग सेंटरों और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों व संदिग्ध युवकों से पूछताछ की गई है। जांच अधिकारियों ने कई मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 2 मई की रात को यह पेपर किन-किन माध्यमों से साझा किया गया था। इस मामले में अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है।

    NTA का रुख और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका

    नीट परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने भी इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। NTA ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि उन्हें 7 मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी से संबंधित कुछ इनपुट मिले थे, जिसे तत्काल प्रभाव से 8 मई को केंद्रीय जांच एजेंसियों के सुपुर्द कर दिया गया है। एजेंसी का कहना है कि वे निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं।

    स्थानीय पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

    जांच में यह बात भी सामने आई है कि परीक्षा वाले दिन ही कुछ सजग छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में इस संदिग्ध गेस पेपर की शिकायत दी थी। छात्रों का स्पष्ट आरोप था कि कुछ लोगों के पास पेपर पहले से मौजूद था। लेकिन आरोप है कि उस समय स्थानीय पुलिस ने इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण अब जांच एजेंसियों के लिए साक्ष्य जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल, डिजिटल चैट और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है।

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