मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा अपने निजी जेट (Private Jet) को छोड़कर एयर इंडिया के साधारण कमर्शियल विमान से दिल्ली की यात्रा करने पर राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्ष ने शिंदे के इस कदम पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस पर तंज कसते हुए दावा किया कि आम जनता की फ्लाइट से सफर करने का यह पूरा घटनाक्रम महज एक दिखावा हो सकता है।
पूरी फ्लाइट बुक करने का लगाया आरोप
संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की इस यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि संभव है कि वह साधारण दिखने वाली फ्लाइट असल में पूरी तरह इन्हीं लोगों के लिए बुक की गई हो। राउत ने बयान दिया, “इन लोगों ने आम पैसेंजर फ्लाइट को ही चार्टर्ड प्लेन में तब्दील कर दिया होगा। इनके पास असीमित पैसा है, ये कुछ भी कर सकते हैं। हो सकता है कि पूरी फ्लाइट के यात्री भी इन्हीं के खेमे के हों। ये लोग बिना चार्टर प्लेन के सफर कर ही नहीं सकते। अगर उस विमान में 200 या 390 सीटों की क्षमता है, तो मुमकिन है कि सारी टिकटें इन्होंने खुद ही खरीद ली हों।”
पीएम मोदी की सादगी वाली अपील का दिया हवाला
दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस यात्रा के पीछे की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील को बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने देश में ईंधन और ऊर्जा की बचत करने का आग्रह किया था, जिसे ध्यान में रखते हुए एकनाथ शिंदे ने प्राइवेट जेट के बजाय आम यात्री विमान से दिल्ली जाने का फैसला किया। वह दोपहर 4 बजे की नियमित फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे, जहाँ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होना था।
सरकारी खर्च और काफिला कम करने का पुराना रिकॉर्ड
एकनाथ शिंदे के समर्थकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने ऐसा कोई कदम उठाया है। वह पहले भी कई मौकों पर सरकारी खजाने और ईंधन की बर्बादी को रोकने की बात कह चुके हैं। इससे पहले भी उन्होंने कुछ दौरों पर वीआईपी हेलिकॉप्टर और अपने बड़े सुरक्षा काफिले (काफिले की गाड़ियों) की संख्या को सीमित किया था। अब एयर इंडिया के विमान से दिल्ली जाने को भी उनकी इसी किफायती और सादगीपूर्ण कार्यशैली का हिस्सा बताया जा रहा है।
दिखावा बनाम सादगी: आमने-सामने सरकार और विपक्ष
उपमुख्यमंत्री के इस कदम ने महाराष्ट्र की राजनीति में 'सादगी बनाम दिखावे' की नई बहस को जन्म दे दिया है। जहाँ एक ओर सत्तापक्ष और शिंदे के समर्थक इसे प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान और राष्ट्रहित में ईंधन बचाने की एक बेहतरीन पहल बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे केवल मीडिया का ध्यान खींचने और पब्लिसिटी बटोरने का एक राजनीतिक स्टंट करार दे रहे हैं।


