कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए भूचाल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बागी सांसदों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों की संसद सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है। करीब एक घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में सौगत रॉय के साथ टीएमसी के चार अन्य सांसद भी मौजूद थे। टीएमसी नेताओं ने स्पीकर के सामने दलील दी कि इन सांसदों का कदम पूरी तरह से असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ है।
संसद सदस्यता रद्द करने की मांग और कानूनी दलीलें
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद सौगत रॉय ने साफ कहा कि जो सांसद अपनी मर्जी से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होते हैं या पार्टी छोड़ते हैं, उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत लोकसभा से बाहर कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि इन बागी सांसदों ने किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ नियमानुसार विलय (मर्जर) नहीं किया है, इसलिए संसद में उनके नए गुट को किसी भी तरह की आधिकारिक मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। टीएमसी नेताओं ने उम्मीद जताई है कि स्पीकर संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप उचित और निष्पक्ष फैसला लेंगे।
20 सांसदों की बगावत से टीएमसी में हड़कंप
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया। इन बागी सांसदों ने एकजुट होकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने और केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन सांसदों ने दो-तिहाई से अधिक संख्या बल होने का दावा करते हुए लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की भी मांग की है। इस आंतरिक टूट ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत को गरमा दिया है।
पार्टी की तीखी प्रतिक्रिया और विपक्ष का तंज
सांसदों के इस कदम से टीएमसी नेतृत्व बेहद गुस्से में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इसे पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के साथ बड़ा धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये सभी सांसद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चेहरे और टीएमसी के सिंबल पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे, और अब भाजपा नीत एनडीए का साथ देना उन वोटरों के साथ विश्वासघात है जिन्होंने भाजपा के खिलाफ मतदान किया था। वहीं, मदन मित्रा ने तंज कसते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का पाला बदलना साफ इशारा करता है कि 'दाल में कुछ काला है।' दूसरी तरफ, भाजपा ने इसे टीएमसी का आंतरिक संकट बताते हुए कहा है कि पार्टी को दूसरों पर ठीकरा फोड़ने के बजाय अपने भीतर झांकना चाहिए।


