राजस्थान विश्वविद्यालय के लोकानुभव-ग्रामानुभूति कार्यक्रम में जयरामपुरा गांव के ग्रामीणों को स्वच्छता और टीबी के प्रति किया जागरूक, विद्यार्थियों ने श्रमदान के साथ सीखी ब्लॉक प्रिंटिंग
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने ग्राम जयरामपुरा में स्वच्छता एवं टीबी के प्रति जागरूकता अभियान चलाया। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग की ओर से आयोजित लोकानुभव-ग्रामानुभूति कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और स्वच्छ वातावरण, व्यक्तिगत साफ-सफाई तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का संदेश दिया।
जयरामपुरा गांव को राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ किसनराव बागड़े की प्रेरणा से राजस्थान विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत गोद लिया है। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को ग्रामीण जीवन से जोड़ना तथा ग्रामीण समुदाय में जागरूकता और सहभागिता बढ़ाकर गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने में योगदान देना है।
प्रशिक्षण के बाद गांव पहुंचे विद्यार्थी और प्राध्यापक
डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ लॉन्ग लर्निंग के निदेशक एवं विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के नोडल अधिकारी डॉ. रोहित कुमार जैन ने बताया कि गांव जाने से पहले विद्यार्थियों के दल को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान मुख्य प्रॉक्टर डॉ. सुरेंद्र सिंह चौहान, प्रख्यात चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा (ईएचसीसी), केंद्र निदेशक डॉ. रोहित कुमार जैन सहित विश्वविद्यालय के कई प्राध्यापक उपस्थित रहे।
इसके बाद विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और विद्यार्थी जयरामपुरा पहुंचे। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ-सफाई, स्वच्छ वातावरण और स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी दी गई। उन्हें घर, विद्यालय और आसपास के परिवेश को साफ रखने के लिए प्रेरित किया गया।
श्रमदान कर दिया स्वच्छता का संदेश
कार्यक्रम के तहत गांव में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने श्रमदान कर सफाई कार्य में भाग लिया। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
घर-घर पहुंचकर टीबी के प्रति किया जागरूक
टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। एनसीसी कैडेट्स और विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संपर्क किया। उन्हें टीबी के लक्षणों, समय पर जांच कराने, नियमित उपचार लेने और बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों से बचने की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही टीबी से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने और उनके साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं करने की अपील की गई।
ग्रामीणों से सीखी ब्लॉक प्रिंटिंग की कला
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ग्रामीण समुदाय के साथ संवाद के दौरान जयरामपुरा में प्रचलित ब्लॉक प्रिंटिंग के काम को भी सीखा। इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण कला, पारंपरिक कौशल और स्थानीय जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिला।
किताबी ज्ञान को सामाजिक अनुभवों से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम की मूल भावना विद्यार्थियों को कक्षा के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ समाज की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराना है। ग्रामीणों के साथ संवाद, श्रमदान और जन-जागरूकता गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों ने सामुदायिक सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुभव प्राप्त किया।
कार्यक्रम में ग्राम सरपंच, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या, शिक्षकगण, ग्रामीणजन तथा राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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