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    नौ साल बाद चीन दौरे पर जाएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति, रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत

    बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आधिकारिक दौरे पर जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कन्फर्म किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान-इस्राइल युद्ध और ग्लोबल एनर्जी संकट पर टिकी हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर हो रही यह यात्रा न केवल व्यापार बल्कि ग्लोबल पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बहुत 'क्रिटिकल' मानी जा रही है।

    ट्रंप का बिजी शेड्यूल: द्विपक्षीय बैठक और वर्किंग लंच

    व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम को बीजिंग लैंड करेंगे। गुरुवार को उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाई-लेवल मीटिंग करेंगे। इस दौरान वे 'टेंपल ऑफ हेवन' का दीदार करेंगे और राजकीय भोज (State Banquet) में शामिल होंगे। शुक्रवार को भी दोनों नेताओं के बीच चाय पर चर्चा और वर्किंग लंच होगा। खबर तो यह भी है कि इस साल के अंत तक शी जिनपिंग भी अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है।

    ट्रेड वॉर खत्म करने की कोशिश और बुसान में बातचीत

    ट्रंप की इस यात्रा का सबसे बड़ा मकसद व्यापारिक तनाव (Trade Tension) को कम करना है। ट्रंप के पहुंचने से ठीक पहले, चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट दक्षिण कोरिया के बुसान में व्यापार वार्ता का आखिरी दौर पूरा करेंगे। कोशिश यही है कि जब दोनों बड़े नेता मिलें, तो व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर कोई ठोस रास्ता निकल सके। दोनों देश चाहते हैं कि व्यापारिक मतभेदों को पीछे छोड़कर इकोनॉमी को मजबूती दी जाए।

    ताइवान और हथियारों की डील पर बना रहेगा सस्पेंस

    भले ही दोनों नेता हाथ मिला रहे हों, लेकिन ताइवान का मुद्दा अभी भी गले की फांस बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी ताइवान पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं आया है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे ताइवान को हथियारों की सप्लाई जारी रखेंगे, जैसा उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में किया था। चीन के दबाव के बावजूद अमेरिका ताइवान के समर्थन से पीछे हटता नहीं दिख रहा है, जिससे यह साफ है कि बातचीत की मेज पर माहौल काफी गरमागरम रहने वाला है।

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