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    बाणसागर डैम से पानी रिलीज, सोन नदी के किनारे प्रशासन अलर्ट मोड में

    शहडोल: मध्य प्रदेश में खरीफ फसलों के सिंचाई सीजन को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में बाणसागर परियोजना प्रबंधन ने एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। परियोजना प्रबंधन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, आज 2.22 जून 2026 की सुबह 6 बजे से ही सोन नदी में पानी छोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। पानी छोड़े जाने के बाद नदी का बहाव तेज होने और जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पहले से ही प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर लोगों को सावधान रहने के निर्देश दिए हैं।

    बाणसागर पक्का बांध संभाग क्रमांक-3 देवलोंद द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खरीफ सीजन की सिंचाई व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सोन नदी में प्रतिदिन करीब 2017 क्यूसेक यानी लगभग 4000 एकड़ फीट पानी छोड़ा जाएगा। इस जल प्रबंधन का सीधा फायदा किसानों को आगामी कृषि कार्यों और फसलों की तैयारी में मिलेगा। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि पानी का बहाव तेज होने के कारण निचले और तटीय इलाकों में सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    किसानों को मिलेगा फायदा, फसलों की तैयारी होगी आसान

    बाणसागर परियोजना मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख और बड़े जल संसाधन प्रोजेक्ट्स में से एक है, जो कई जिलों के लिए सिंचाई और पीने के पानी का मुख्य जरिया है। हर साल खरीफ का सीजन शुरू होने से पहले जलाशय से नियंत्रित (तय मात्रा में) तरीके से पानी रिलीज किया जाता है, ताकि नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। सिंचाई विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पानी मिलने से किसानों को धान, मक्का और सोयाबीन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुवाई और तैयारी करने में बड़ी मदद मिलेगी।

    सोन नदी के किनारे बसे गांवों के लिए सख्त चेतावनी

    बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण मैहर जिले के रामनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कई तटीय गांवों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन ने मुख्य रूप से इन गांवों के लिए गाइडलाइन जारी की है:

    • प्रभावित गांव: केथहा, सरिया, हरियरी, डड़िया, कुआं, राझुआ, पेपखरा और इनके आसपास के सभी निचले इलाके।

    • अपील और निर्देश: ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे नदी के किनारे या जलधारा के पास बिल्कुल न जाएं।

    • पशुपालक और मछुआरे: पशुपालकों से कहा गया है कि वे अपने मवेशियों को नदी किनारे चराने या बांधने की गलती न करें। इसके साथ ही मछुआरों और नदी पार करने वाले लोगों को भी पानी के अचानक बढ़ते बहाव को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    प्रशासन का आश्वासन:

    स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार नदी के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल छोड़ने की पूरी प्रक्रिया की पल-पल मॉनिटरिंग की जा रही है और सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम मुस्तैद हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल सरकारी निर्देशों का पालन करें।

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