तेल अवीव। इस्राइल में आज आम चुनाव का अहम दिन है, जहां कुल अड़तीस राजनीतिक दल चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस राजनीतिक मुकाबले में सत्ताधारी लिकुड पार्टी, विपक्षी याशर और ब्लू एंड व्हाइट पार्टी सबसे आगे चल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री पद के लिए चल रही इस चुनावी रेस में मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी दल याशर के प्रमुख गादी आइजेनकॉट बनकर उभरे हैं। गादी आइजेनकॉट की लोकप्रियता इस तेजी से बढ़ी है कि कई प्रमुख चुनावी सर्वेक्षणों में उन्हें प्रधानमंत्री नेतन्याहू से आगे बताया जा रहा है, जिससे इस्राइल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।
कौन हैं गादी आइजेनकॉट और उनका प्रारंभिक जीवन
गादी आइजेनकॉट मोरक्को से आए मिजराही यहूदी अप्रवासी माता-पिता की संतान हैं। उनका बचपन इस्राइल के तिबेरियास और इलात शहरों में एक साधारण कामकाजी परिवार के बीच बीता। वे अपने माता-पिता के नौ बच्चों में दूसरे स्थान पर हैं। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी होते ही उनकी भर्ती सेना में हो गई थी। अपने चार दशकों लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और तेल अवीव यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्नातक तथा हाइफा यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। गाजा युद्ध के दौरान उनके परिवार को भारी व्यक्तिगत क्षति उठानी पड़ी, जब दिसंबर 2023 में उनके सबसे छोटे बेटे गाल मीर आइजेनकॉट एक सैन्य अभियान के दौरान हमास के हमले में शहीद हो गए थे। इसके अलावा युद्ध काल में उनके दो भतीजों का भी निधन हो गया था।
साधारण पैदल सैनिक से इस्राइल रक्षा बलों के चीफ ऑफ स्टाफ तक का सफर
गादी आइजेनकॉट का सैन्य सफर लगभग चालीस वर्षों का रहा है, जिसमें वे वर्ष 1978 में इस्राइली सेना की गोलानी ब्रिगेड में एक सामान्य पैदल सैनिक के रूप में शामिल हुए थे। अपनी कार्यकुशलता के बल पर वे स्क्वाड लीडर और प्लाटून कमांडर जैसे पदों से होते हुए वर्ष 2015 से 2019 तक इस्राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के सर्वोच्च पद यानी चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में देश की सेवा की। वर्ष 1999 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इहुद बराक का सैन्य सचिव नियुक्त किया गया था। वर्ष 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान उत्तरी कमान के प्रमुख के रूप में उन्होंने अपनी सैन्य रणनीतिक क्षमताओं का लोहा मनवाया था और सेना के भीतर कड़े अनुशासन एवं उच्च नैतिक मूल्यों की स्थापना की थी।
विवादित 'दहिया सिद्धांत' और सैन्य रणनीति
उत्तरी कमान के प्रमुख के दायित्व का निर्वहन करते हुए गादी आइजेनकॉट ने चर्चित 'दहिया सिद्धांत' की रूपरेखा तैयार की थी। इस आक्रामक सैन्य रणनीति के तहत इस्राइल पर किसी भी दिशा से होने वाले हमलों के जवाब में कई गुना अधिक और भारी बल के प्रयोग की वकालत की गई है, जिसमें नागरिक बुनियादी ढांचे और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने का प्रावधान शामिल है। इस सिद्धांत का पहला बड़ा प्रदर्शन वर्ष 2006 के इस्राइल-लेबनान युद्ध के दौरान देखने को मिला था, जब हिजबुल्लाह के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की गई थी।
सेना से राजनीतिक मैदान में प्रवेश और नेतन्याहू के समक्ष बड़ी चुनौती
वर्ष 2019 में सेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात गादी आइजेनकॉट ने वर्ष 2022 में औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखा। सात अक्टूबर 2023 को हुए हमलों के बाद उपजे राष्ट्रीय संकट के समय वे बेंजामिन नेतन्याहू की आपातकालीन युद्ध कैबिनेट का हिस्सा बने थे, परंतु युद्ध की स्पष्ट रणनीति के अभाव और अन्य राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने जून 2024 में इस कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे पूरी तरह से विपक्ष में आ गए और 'याशर' (यानी ईमानदार) पार्टी का नेतृत्व संभालते हुए घरेलू जवाबदेही, शासन में पारदर्शिता और सैन्य सुधारों को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू के समक्ष एक मजबूत और कड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़े हो गए हैं।


