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    कर्मभूमि से जुड़कर मातृभूमि के लिए बढ़ रहा जनसहयोग, जल संरक्षण अभियान को मिल रही नई दिशा

    जल संरक्षण के माध्यम से मातृभूमि से जुड़ रहे प्रवासी राजस्थानी, अभियान बना जनभागीदारी का सशक्त माध्यम

    अलवर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच से शुरू किया गया ‘कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान’ प्रदेश में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के साथ-साथ प्रवासी राजस्थानियों को अपनी जन्मभूमि से जोड़ने का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कैच द रेन” अभियान से प्रेरित इस पहल का शुभारंभ 15 जनवरी 2025 को जयपुर से किया गया था।

    अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, गिरते भूजल स्तर को रोकना तथा राजस्थान को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही प्रदेश से बाहर रह रहे प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मातृभूमि के विकास कार्यों से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

    राज्य सरकार का मानना है कि व्यक्ति की कर्मभूमि भले ही कहीं भी हो, लेकिन मातृभूमि के प्रति उसका दायित्व सदैव बना रहता है। इसी भावना के अनुरूप अभियान के माध्यम से नागरिकों को जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, ग्रामीण विकास और स्थानीय संसाधनों के संवर्धन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    अभियान के तहत वर्षा जल की प्रत्येक बूंद के संरक्षण, भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण तथा जल के प्रति व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया है। इसके माध्यम से प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मूल संस्कृति, परंपरा और विरासत से पुनः जोड़ते हुए स्थानीय विकास कार्यों में सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    राज्य सरकार की योजना के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में औसतन चार रिचार्ज शाफ्ट विकसित किए जाएंगे। इस लक्ष्य के तहत प्रदेश के 41 जिलों की ग्राम पंचायतों में 45 हजार से अधिक रिचार्ज शाफ्ट संरचनाओं के निर्माण का कार्य प्रस्तावित है, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन और भूजल स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

    इस जनभागीदारी आधारित अभियान में प्रवासी राजस्थानियों, भामाशाहों, क्राउड फंडिंग तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड का भी उपयोग किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से जल संरक्षण को स्थायी जनअभियान बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

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