लाइसेंस में ग्रीन पटाखों की अनुमति, बाजार में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री की शिकायतें; आबादी के बीच भंडारण की आशंका से बढ़ी सुरक्षा की चिंता
खैरथल-तिजारा। दीपावली का त्योहार नजदीक है और इसके साथ ही पटाखों का कारोबार भी जोर पकड़ने लगा है। खैरथल में ट्रांसपोर्ट के जरिए बड़ी मात्रा में पटाखे पहुंचने की चर्चाओं और शहर के अलग-अलग हिस्सों में कथित गोदामों में इनके भंडारण की सूचनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, बाजार में लाइसेंस के तहत स्वीकृत ग्रीन पटाखों के बजाय प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री की शिकायतें भी जांच की जरूरत को रेखांकित कर रही हैं।
सवाल सीधा है—अगर पटाखों का कारोबार नियमों के तहत हो रहा है, तो उनकी आवक, भंडारण और बिक्री की पूरी व्यवस्था की जांच क्यों न हो? आखिर ट्रांसपोर्ट से आने वाली खेप कहां उतारी जा रही है, उसका स्टॉक कहां रखा जा रहा है और क्या संबंधित स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है? दीपावली से पहले इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।
ट्रांसपोर्ट से खेप, फिर कहां जाता है माल?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि ट्रांसपोर्ट के माध्यम से पटाखों की बड़ी खेप खैरथल पहुंच रही है। इसके बाद माल को शहर के अलग-अलग स्थानों पर रखे जाने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन सूचनाओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन यदि इनमें सच्चाई है तो पूरे आपूर्ति तंत्र की जांच आवश्यक हो जाती है।
प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि पटाखे किससे मंगवाए जा रहे हैं, परिवहन के दस्तावेज क्या हैं, माल किसके नाम पर पहुंच रहा है और उसे किन स्थानों पर उतारा जा रहा है। बिल, परिवहन दस्तावेज, लाइसेंस और स्टॉक रजिस्टर का मिलान करने से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
आबादी के बीच गोदाम मिले तो कौन लेगा जिम्मेदारी?
शहर में कई स्थानों पर पटाखों के भंडारण के लिए गोदाम होने की चर्चाएं हैं। यदि किसी रिहायशी इलाके में नियमों के विपरीत बड़ी मात्रा में पटाखे जमा किए जा रहे हैं, तो यह स्थानीय निवासियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
पटाखों का भंडारण सामान्य सामान रखने जैसा नहीं है। आग लगने की स्थिति में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है और आसपास के मकानों तक आग फैलने का खतरा भी रहता है। ऐसे में केवल लाइसेंसधारी दुकानों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। संभावित गोदामों, ट्रांसपोर्ट से माल उतारने वाले स्थानों और अस्थायी भंडारण केंद्रों की भी जांच जरूरी है।
यदि किसी गोदाम में नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अब तक निगरानी व्यवस्था कहां थी।
लाइसेंस में ग्रीन पटाखे, बाजार में क्या बिक रहा है?
पटाखों की बिक्री को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि दुकानों पर उपलब्ध पटाखे संबंधित लाइसेंस और लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। केवल लाइसेंस होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लाइसेंस की शर्तों, अनुमत पटाखों की श्रेणी, निर्धारित मात्रा और भंडारण संबंधी नियमों का पालन भी जरूरी है।
प्रशासन को दुकानों में उपलब्ध स्टॉक की जांच के साथ यह भी देखना चाहिए कि ट्रांसपोर्ट से आने वाले माल के दस्तावेज और वास्तविक स्टॉक में कोई अंतर तो नहीं है। प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री की शिकायतों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसों की चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
पटाखों से जुड़े हादसे यह स्पष्ट कर चुके हैं कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। वर्ष 2024 में खैरथल में पटाखों के कथित अवैध भंडारण वाले मकान में आग लगने की घटना सामने आई थी। वहीं, फरवरी 2026 में भिवाड़ी में पटाखों से जुड़े कारखाने में आग लगने से आठ लोगों की मौत हुई थी।
इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में पटाखों के भंडारण और बिक्री को लेकर किसी भी शिकायत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। समय रहते जांच और सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करना ही संभावित हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
दीपावली से पहले संयुक्त जांच की दरकार
दीपावली से पहले पुलिस, स्थानीय निकाय और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम बनाकर ट्रांसपोर्ट गोदामों, पटाखा दुकानों और संदिग्ध भंडारण स्थलों की जांच की जा सकती है। इसमें लाइसेंस, स्टॉक, परिवहन दस्तावेज, भंडारण की निर्धारित मात्रा और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल जरूरी है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
खैरथल में पटाखों की आवक और कथित गोदामों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जांच से ही मिल सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह शिकायतों की पुष्टि कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और नियमों का उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे।
दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, किसी परिवार के लिए खतरे का कारण नहीं। इसलिए जरूरी है कि किसी संभावित हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन सूचनाओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के लिए कब कदम उठाते हैं।
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