तेहरान। भारतीय नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बार फिर अपनी बहादुरी और पराक्रम का लोहा मनवाते हुए सोमालिया के तट के समीप समुद्री लुटेरों के चंगुल से ईरान के एक मछली पकड़ने वाले जहाज 'अजिनी' को सुरक्षित छुड़ा लिया है। इस सफल और साहसी बचाव अभियान के दौरान जहाज पर सवार सभी बीस ईरानी चालक दल के सदस्यों को पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया गया। इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने भी नौसेना के साथ मिलकर बेहद अहम और निर्णायक भूमिका निभाई। करीब अड़तालीस घंटे तक चले इस कड़े अभियान में किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान या किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। भारत की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से प्रभावित होकर ईरान सरकार ने भारतीय नौसेना और वायुसेना के अदम्य साहस, पेशेवर कार्यकुशलता तथा उत्कृष्ट आपसी तालमेल की खुले शब्दों में भूरी-भूरी प्रशंसा की है।
सोमालियाई तट के पास समुद्री लुटेरों द्वारा जहाज का अपहरण
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, ईरानी मछली पकड़ने वाले पोत 'अजिनी' को कुछ सप्ताह पूर्व सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तटीय इलाके में हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया था। यह दुस्साहसिक घटना सोमालियाई क्षेत्र के बंदर बायला और हाफुन बंदरगाहों के बीच समुद्र में घटी थी। क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की प्रबल आशंका थी कि ये सशस्त्र लुटेरे इस अपहृत जहाज को हिंद महासागर में गुजरने वाले अन्य बड़े और बहुमूल्य व्यापारिक जहाजों पर हमले करने के लिए एक 'मदर शिप' यानी अस्थायी बेस के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए इस पूरे समुद्री जोन में नौसेना द्वारा निगरानी और गश्त को अत्यंत तीव्र कर दिया गया था।
आईएनएस कोलकाता की तैनाती और कमांडो कार्रवाई
समुद्री लुटेरों के नापाक मंसूबों को नाकाम करने और अपहृत पोत को मुक्त कराने के लिए भारतीय नौसेना ने एक सुनियोजित अभियान का आगाज किया। इस मिशन के तहत क्षेत्र में पहले से तैनात भारतीय युद्धपोत 'आईएनएस कोलकाता' को तुरंत मौके पर रवाना किया गया। अत्याधुनिक समुद्री निगरानी विमानों और अन्य खुफिया तकनीकी संसाधनों की मदद से उस अपहृत जहाज की सटीक स्थिति का पता लगाया गया और उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई। इसके पश्चात, भारतीय वायुसेना के विशाल सी-17 परिवहन विमान के जरिए नौसेना के विशेष मार्कोस (मरीन कमांडो) को सटीक रणनीति के तहत लक्षित क्षेत्र में उतारा गया। कमांडो दल ने त्वरित और पेशेवर कार्रवाई करते हुए जहाज पर धावा बोला और उसे अपने नियंत्रण में लेते हुए समुद्री लुटेरों के खतरे को पूरी तरह समाप्त कर दिया।


