मिशनसच न्यूज, अलवर। रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले अलवर की घरेलू महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता की मिसाल पेश की है। नगर निगम से जुड़े स्वयं सहायता समूह की 100 से अधिक महिलाओं ने आर्ट एंड क्राफ्ट में दक्षता हासिल कर अपने हाथों से राखियां और अन्य सजावटी उत्पाद तैयार किए हैं। इन महिलाओं की मेहनत और कौशल का नतीजा सोमवार से सामने आएगा, जब पुराने सूचना केंद्र (नेहरू उद्यान के बाहर) इनकी बनाई राखियों और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।
सृजन और स्वावलंबन की ओर बढ़ता कदम
इन महिलाओं को ‘नेक कमाई फाउंडेशन’ द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय संस्था है। संस्था की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर बिंदू कपूर के नेतृत्व में महिलाओं को राखी, जूट उत्पाद, उपहार सामग्री, शो-पीस, मुरब्बा और अचार निर्माण जैसे विविध क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। खास बात यह है कि प्रदर्शनी में जो भी बिक्री होगी, वह बिना मुनाफे के की जाएगी ताकि महिलाओं को सीधा प्रोत्साहन और ग्राहक से जुड़ने का मौका मिल सके।
प्रशिक्षण से पहचान तक
बिंदू कपूर ने बताया कि 31 महिलाओं ने विशेष रूप से राखी बनाने का प्रशिक्षण लिया है, जबकि अन्य ने जूट बैग, सजावटी सामग्रियों और घरेलू खाद्य उत्पादों को तैयार करना सीखा है। यह सभी महिलाएं पहले घरेलू कामकाज में व्यस्त थीं, लेकिन अब उन्होंने रचनात्मक कार्यों में भाग लेकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है।
प्रशासनिक सहयोग और राष्ट्रीय पहचान
इन स्वयं सहायता समूहों को जिला प्रशासन से भी लगातार सहयोग मिला है। जिला स्तर पर आयोजित मेलों और प्रदर्शनियों में इनकी स्टॉल को लोगों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। यही नहीं, देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर इन महिलाओं को सम्मानित भी किया गया है, जिससे इनका हौसला और आत्मविश्वास बढ़ा है।
प्रदर्शनी में क्या-क्या मिलेगा?
प्रदर्शनी में हाथ से बनी राखियों के अलावा जूट से बने बैग, सजावटी शो-पीस, उपहार वस्तुएं, घर के उपयोग की सामग्री, अचार, मुरब्बे और अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। ये सभी उत्पाद पूरी तरह से इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हैं और इनके जरिए वे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।
शहरवासियों से अपील
कोऑर्डिनेटर बिंदू कपूर ने अलवर वासियों से अपील की है कि वे प्रदर्शनी में आकर इन मेहनती महिलाओं के प्रयासों को सराहें और उन्हें प्रोत्साहित करें। इससे न केवल इन महिलाओं को आत्मबल मिलेगा, बल्कि शहर की स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों को भी पहचान मिलेगी।
अलवर की इन घरेलू महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर मार्गदर्शन और मंच मिले तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह प्रदर्शनी केवल राखियों की बिक्री नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों को समर्थन देने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
Shandar