25 हजार प्रबोधकों की समस्याओं के समाधान और शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने को लेकर भी दिए अहम सुझाव
जयपुर। राजस्थान प्रबोधक संघ ने प्रदेश के करीब 25 हजार प्रबोधकों की लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को जयपुर स्थित शिक्षा संकुल सभागार में आयोजित शिक्षक संगठनों की बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, शासन सचिव कृष्ण कुणाल तथा शिक्षा निदेशक सीताराम जाट को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सिंह शेखावत के हस्ताक्षर वाले इन ज्ञापनों में प्रबोधक कैडर से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान तथा नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों को लेकर व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए।
प्रबोधक संघ राजस्थान के प्रदेश महामंत्री संजय कौशिक ने बताया कि प्रबोधक सेवा संबंधी ज्ञापन में संगठन ने मांग की है कि वर्ष 2008 से पहले राजकीय उपक्रमों व विद्यालयों में की गई अनुबंध आधारित सेवाओं को प्रबोधक सेवा में जोड़ा जाए, ताकि सभी प्रबोधकों को पूर्ण पेंशन का लाभ मिल सके। साथ ही 1 जुलाई 2013 को मूल वेतन 11,170 रुपये के स्थान पर 12,920 रुपये निर्धारित किया जाए और 25 हजार प्रबोधकों को इसका नगद लाभ प्रदान किया जाए।
संघ ने मांग की कि वरिष्ठ प्रबोधकों (बी.एड./बी.पी.एड.) को द्वितीय श्रेणी अध्यापक के समकक्ष कार्यभार दिया जाए तथा उन्हें मिडिल स्कूलों में हेडमास्टर या सेकेंडरी सेटअप में विषयाध्यापक के रूप में नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही पदनाम बदलकर वरिष्ठ प्रबोधक (बी.एड./बी.पी.एड.) को “वरिष्ठ अध्यापक” तथा प्रबोधक (एसटीसी) को “अध्यापक” किया जाए।
संघ ने शेष बचे 5,392 प्रबोधकों की शीघ्र पदोन्नति करने, अन्य संवर्गों की तरह नियमित डीपीसी आयोजित करने तथा पदोन्नति के पांच अवसर प्रदान करने की मांग भी रखी। इसके अलावा व्याख्याता पद पर 20 प्रतिशत कोटा तय करने, पूर्ण पेंशन के लिए सेवा अवधि 25 वर्ष से घटाकर 20 वर्ष करने तथा एसीपी का लाभ 9-18-27 वर्ष के बजाय 8-16-24 वर्ष पर देने की मांग भी की गई। संघ ने समसा, विवेकानंद मॉडल स्कूल, कस्तूरबा छात्रावास, मेवात बालिका आवासीय विद्यालय, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों तथा जनजाति छात्रावासों में अन्य शिक्षकों की तरह प्रबोधकों को भी प्रतिनियुक्ति का अवसर देने की मांग की।
शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने पर दिए सुझाव
संघ ने शासन सचिव को सौंपे ज्ञापन में बताया कि इस वर्ष शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू किया जा रहा है, इसलिए वर्ष 2006 के अनुभवों का अध्ययन कर व्यवस्थाएं बेहतर बनाई जाएं। संघ ने सुझाव दिया कि 1 अप्रैल से ग्रीष्मावकाश तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य रखी जाए। इसी दिन पुरानी पुस्तकों का संग्रह, नई पुस्तकों का वितरण, परीक्षा परिणाम घोषणा, मार्कशीट वितरण और मेघा पीटीएम का आयोजन किया जाए।
इसके अलावा प्रवेशोत्सव के तहत अभिभावकों से संपर्क और प्रचार-प्रसार किया जाए तथा प्रत्येक विद्यालय का 15 दिनों में दो बार निरीक्षण अनिवार्य किया जाए। संघ ने यह भी सुझाव दिया कि विद्यालय 21 जून के बजाय 1 जुलाई से खोले जाएं, क्योंकि पहले बच्चे नियमित रूप से नहीं आते हैं। प्रवेश की आयु निजी विद्यालयों की तरह व्यवहारिक बनाई जाए और पीएम श्री विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को शीघ्र पूरा किया जाए।
संघ ने यह भी कहा कि द्वितीय श्रेणी से व्याख्याता पदोन्नति काउंसलिंग में नगर पालिका क्षेत्र के रिक्त पद भी दर्शाए जाएं। मिड-डे मील और दूध वितरण की जिम्मेदारी शिक्षकों से हटाकर किसी अन्य एजेंसी को दी जाए तथा दूध के स्थान पर अंकुरित अनाज, मिलेट्स और फल देने की व्यवस्था की जाए।
प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सिंह शेखावत ने कहा कि भाजपा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने और तीसरे बजट से पूर्व संवाद के लिए शिक्षक संगठनों को आमंत्रित किए जाने पर संघ सरकार को बधाई देता है। उन्होंने कहा कि अब गत बजट में घोषित प्रबोधक पुनर्गठन को लागू करते हुए कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों का समाधान किया जाना चाहिए। संघ ने विश्वास जताया कि सरकार प्रबोधकों की समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय लेगी और संगठन हमेशा सरकार के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
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