2025 में 16 हजार से अधिक वोटों की जीत 2026 में करीब 2 हजार तक सिमटी, चार केंद्रीय पदों में से एक पर निर्दलीय ने मारी बाजी
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी डूसू चुनाव 2026 के परिणामों को केवल जीती गई सीटों के आधार पर देखने के बजाय 2025 के आंकड़ों से तुलना की जाए तो मुकाबले की तस्वीर में कई बदलाव नजर आते हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 2026 में चार केंद्रीय पदों में से तीन—अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया।
अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास को 24,576 वोट मिले और उन्होंने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोटों पर रोकते हुए 2,053 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं 2025 में एबीवीपी के आर्यन मान ने 28,841 वोट हासिल कर एनएसयूआई की जोश्लिन नंदिता चौधरी को 12,645 वोटों पर हराया था। उस चुनाव में जीत का अंतर 16,196 वोट था।
इस तरह अध्यक्ष पद पर एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की, लेकिन दोनों वर्षों के बीच जीत के अंतर में बड़ा बदलाव आया। 2025 में जहां अंतर 16 हजार से अधिक था, वहीं 2026 में यह घटकर 2,053 वोट रह गया।
अध्यक्ष पद पर मुकाबला हुआ अधिक करीबी
2026 के अध्यक्ष पद के आंकड़े बताते हैं कि यश डबास और विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा। डबास को 24,576 और मीणा को 22,523 वोट मिले। वाम समर्थित उम्मीदवार अनाया रतूड़ी को 5,377 वोट मिले, जबकि अन्य उम्मीदवारों को भी वोट मिले।
इसके विपरीत 2025 में आर्यन मान और जोश्लिन नंदिता चौधरी के बीच अंतर काफी बड़ा था। आर्यन मान को 28,841 और जोश्लिन को 12,645 वोट मिले थे। इस तुलना से यह तथ्य सामने आता है कि अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की जीत बरकरार रही, लेकिन 2026 में मुकाबला पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी रहा।
उपाध्यक्ष पद ने बदला चुनावी समीकरण
2026 के चुनाव में सबसे उल्लेखनीय परिणाम उपाध्यक्ष पद का रहा। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। एबीवीपी की इशू मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले।
दीपांशु शौकीन पहले एनएसयूआई से जुड़े रहे थे और इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। उनका जीतना डूसू के केंद्रीय पैनल में निर्दलीय उम्मीदवार के लिए एक महत्वपूर्ण परिणाम रहा। भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, यह उपाध्यक्ष पद पर दो दशक में किसी निर्दलीय उम्मीदवार की पहली जीत थी।
2025 में उपाध्यक्ष पद एनएसयूआई के राहुल झांसला ने 29,339 वोट हासिल कर जीता था, जबकि एबीवीपी के गोविंद तंवर को 20,547 वोट मिले थे।
सचिव और संयुक्त सचिव के आंकड़े भी बदले
सचिव पद पर 2026 में एबीवीपी की रिया छाबड़ी को 21,650 वोट मिले, जबकि 2025 में एबीवीपी के कुणाल चौधरी ने 23,779 वोट हासिल किए थे। संयुक्त सचिव पद पर 2026 में एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह को 16,615 वोट मिले, जबकि 2025 में इसी पद पर एबीवीपी की दीपिका झा को 21,825 वोट मिले थे।
इसलिए केवल सीटों की संख्या देखें तो दोनों वर्षों में एबीवीपी का केंद्रीय पैनल प्रदर्शन समान रहा—तीन पदों पर जीत। लेकिन अलग-अलग पदों पर मिले वोटों की संख्या में बदलाव दिखाई देता है।
क्या सच में एबीवीपी का वोट शेयर घटा?
यहां वोटों की संख्या और वोट प्रतिशत के बीच अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध परिणामों में प्रत्येक पद पर कुल पड़े मत अलग-अलग रहे हैं। इसलिए चार उम्मीदवारों के वोटों का साधारण औसत निकालकर उसे एबीवीपी का वास्तविक वोट शेयर कहना सही नहीं होगा।
हालांकि, पदवार आंकड़ों से यह जरूर स्पष्ट है कि 2026 में एबीवीपी के कुछ उम्मीदवारों को 2025 की तुलना में कम वोट मिले और अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर भी काफी घटा। दूसरी ओर, एबीवीपी ने सचिव और संयुक्त सचिव सहित तीन केंद्रीय पदों पर अपनी जीत बरकरार रखी।
इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि एबीवीपी की सीटों की संख्या में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन कई पदों पर उसके उम्मीदवारों के वोटों और जीत के अंतर में महत्वपूर्ण बदलाव आया।
छात्र मुद्दों की भूमिका पर भी नजर
2026 के डूसू चुनाव में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा। चुनाव के दौरान छात्र सुरक्षा, आवास और छात्रावास जैसी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। हाल की छात्रावास संबंधी घटना के बाद सुरक्षा और आवास को लेकर भी बहस तेज हुई।
दीपांशु शौकीन की जीत के संदर्भ में भी छात्रावास और आवास से जुड़े मुद्दों का उल्लेख सामने आया है। हालांकि, किसी एक मुद्दे को उनके प्रदर्शन या एबीवीपी के वोटों में बदलाव का निर्णायक कारण मानने के लिए छात्र मतदाताओं के सर्वेक्षण और मतदान व्यवहार से जुड़े विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता होगी। उपलब्ध चुनाव परिणाम अकेले किसी कारण को प्रमाणित नहीं करते।
2026 के नतीजे क्या संकेत देते हैं?
डूसू चुनाव 2026 में एबीवीपी ने तीन केंद्रीय पद जीतकर अपना पिछला सीट प्रदर्शन दोहराया। वहीं उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में जाना और अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर 16,196 से घटकर 2,053 रह जाना चुनाव की महत्वपूर्ण विशेषताएं रहीं।
इस लिहाज से 2026 का चुनाव सीटों के स्तर पर निरंतरता और वोटों के स्तर पर बदलाव—दोनों पहलुओं को सामने रखता है। छात्र राजनीति के मिजाज में क्या स्थायी बदलाव आया है, यह तय करने के लिए अगले चुनावों के परिणाम, छात्र मुद्दों पर सर्वेक्षण और विभिन्न संगठनों के वोट आधार का विस्तृत अध्ययन अधिक उपयोगी होगा।
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