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    दुकानें आवंटित होने के बाद भी नहीं थमा विरोध, नगर निगम के सामने महिलाओं ने लगाया जाम

    महिलायें बोलीं—20 से 50 साल से इसी बाजार में लगा रहे हैं दुकान, दूसरी जगह भेजने से छिन जाएगा रोजगार

    अलवर। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही शहर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है, लेकिन इसी बीच नगर निगम के सामने फुटपाथ पर दुकान लगाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले छोटे व्यापारियों की आजीविका का मुद्दा गरमा गया है। नगर निगम की ओर से 300 दुकानों का आवंटन किए जाने के बावजूद स्थानीय महिला दुकानदारों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को अपनी मांगों को लेकर महिलाओं और अन्य दुकानदारों ने नगर निगम के सामने जाम लगाकर प्रदर्शन किया।

    20 से 50 साल से इसी बाजार में लगा रहे हैं दुकान

    प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि वे पिछले 20 से 50 वर्षों से इसी बाजार में दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। लंबे समय से यहां कारोबार करने के कारण बाजार में उनकी पहचान बन चुकी है और नियमित ग्राहक भी इसी स्थान पर आते हैं।

    महिलाओं का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी इसी बाजार पर निर्भर है। यदि उन्हें दूसरी जगह दुकान लगाने के लिए भेजा जाता है तो वहां ग्राहक कैसे पहुंचेंगे और उनका कारोबार कैसे चलेगा? उन्होंने मांग की कि वर्षों से इसी बाजार में दुकान लगाने वाले स्थानीय दुकानदारों के रोजगार का ध्यान रखा जाए।

    300 दुकानें, आवेदन 800 से 1000 तक

    नगर निगम की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, दुकानदारों के लिए कुल 300 दुकानें उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि इनके लिए करीब 800 से 1000 आवेदन प्राप्त हुए थे। ऐसे में उपलब्ध दुकानों की तुलना में आवेदकों की संख्या काफी अधिक है। इसी वजह से कई दुकानदारों के सामने दुकान आवंटन और अपना पुराना रोजगार जारी रखने का सवाल खड़ा हो गया है।

    निगम के सामने आजीविका बचाने की चुनौती

    दीपावली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले छोटे दुकानदारों की यह परेशानी सामने आई है। एक ओर नगर निगम शहर को व्यवस्थित करने और अतिक्रमण हटाने की दिशा में कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से इसी बाजार पर निर्भर दुकानदारों की आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

    अब सवाल यह है कि जिन महिलाओं और छोटे व्यापारियों को दुकानें आवंटित नहीं हो पाईं, उनके लिए निगम प्रशासन क्या व्यवस्था करेगा? क्या उन्हें उसी बाजार में कारोबार जारी रखने का अवसर मिलेगा या रोजगार के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी?

    फिलहाल दुकानदारों के विरोध और मांगों के बीच निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि दीपावली से पहले प्रशासन इनकी समस्या का क्या समाधान निकालता है।

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