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    अलवर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, कालवाड़ी में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जानकारी

    विधिक जानकारी पर जोर, कालवाड़ी में ग्रामीणों व विद्यार्थियों को दी महत्वपूर्ण सीख

    अलवर। माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के निर्देशानुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कालवाड़ी में मानव-वन्यजीव संघर्ष विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 50 लाभार्थियों ने भाग लेकर महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी प्राप्त की।

    कार्यक्रम की शुरुआत नालसा थीम सॉन्ग “एक मुठ्ठी आसमां” के साथ की गई। इसके बाद पीएलवी दीपक कुमार मीना ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।

    शिविर में बताया गया कि भारत में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संघर्ष एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। जब जंगली जानवर इंसानी बस्तियों में प्रवेश कर फसलों या जानमाल को नुकसान पहुंचाते हैं, तो ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं।

    दीपक कुमार मीना ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून जंगली जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। विभिन्न अनुसूचियों में जानवरों को उनकी स्थिति के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जिसमें बाघ और हाथी जैसे जानवरों को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध माना गया है।

    उन्होंने धारा 11 और धारा 39 के प्रावधानों को समझाते हुए कहा कि आम नागरिक को स्वयं किसी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है, सिवाय आत्मरक्षा की स्थिति में। साथ ही वन्यजीव को सरकारी संपत्ति माना जाता है, इसलिए उसके किसी भी अंग या शव पर किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं होता।

    शिविर में आत्मरक्षा के अधिकार पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें बताया गया कि यदि कोई जंगली जानवर अचानक हमला करता है तो अपनी जान बचाने के लिए की गई कार्रवाई को अपराध नहीं माना जाएगा, बशर्ते वह जानबूझकर उकसाया न गया हो।

    मुआवजा प्रावधानों के तहत जनहानि, स्थायी विकलांगता, फसल नुकसान और पशुधन हानि के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी भी दी गई। साथ ही लोगों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए कि वन्यजीवों को उकसाना, भीड़ द्वारा हिंसा करना या संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण करना कानूनी अपराध है।

    शिकायत प्रक्रिया के तहत बताया गया कि संघर्ष की स्थिति में तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें, मौके का पंचनामा करवाएं और साक्ष्य सुरक्षित रखें। साथ ही अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।

    कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रामावतार शर्मा, उपप्राचार्य रामप्रसाद सैनी, विक्रम सिंह, श्रीमती मिथलेश कुमारी, अविनेश कुमार शर्मा, लालाराम सैनी सहित विद्यालय स्टाफ और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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