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    भरतपुर की ऐतिहासिक बगीचियों के संरक्षण की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा प्रस्ताव

    भरतपुर में धरोहर संरक्षण पर जोर, बगीचियों के पुनर्जीवन हेतु विशेष योजना की मांग

    भरतपुर। समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर भरतपुर शहर की ऐतिहासिक बगीचियों, कुंडों, तालाबों एवं जल निकायों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष “भरतपुर बगीची विकास एवं पुनर्जीवन योजना” लागू करने की मांग की है।

    सीताराम गुप्ता ने बताया कि भरतपुर शहर अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहरों के लिए विशेष पहचान रखता है। स्थापना काल से यहां अनेक बगीचियां, कुंड, डिग्गियां और जल स्रोत विकसित किए गए थे, जिनका उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं बल्कि जल संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वास्थ्य संवर्धन और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना था।

    उन्होंने बताया कि समृद्ध भारत अभियान द्वारा समाज के सहयोग से भूरी सिंह बगीची, अलक-झलक बगीची, गोलमोल बगीची और जसवंत प्रदर्शनी स्थल सहित कई स्थानों पर पुनरुद्धार एवं विकास कार्य कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद शहर की कई ऐतिहासिक बगीचियां और जल निकाय आज भी जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा में हैं।

    प्रस्ताव में वाय वृक्ष बगीची, हरिहर बगीची, नवग्रह कुंड बगीची, श्मशानेश्वर महादेव बगीची तथा किले के अंदर स्थित बांगड़ वाले हनुमान जी की बगीची सहित अन्य स्थलों के विकास को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।

    प्रस्तावित योजना में सभी प्राचीन एवं सार्वजनिक बगीचियों का सर्वे कर संरक्षण और सौंदर्यीकरण, पुराने कुंडों, तालाबों और बावड़ियों की सफाई एवं जीर्णोद्धार, वृक्षारोपण अभियान के तहत छायादार और फलदार पौधों का रोपण, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं का विकास शामिल है।

    इसके अलावा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की बगीचियों को पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने, तालाबों और कुंडों का गहरीकरण कर वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा युवाओं और बच्चों के लिए योग एवं व्यायाम स्थल विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है।

    सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की कि भरतपुर की ऐतिहासिक बगीचियों एवं जल निकायों के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष योजना बनाकर आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक धरोहर का लाभ उठा सकें।

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