सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश और निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर लगातार खड़े हो रहे विभिन्न सवालों के बीच निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी आधिकारिक सफाई पेश की है। विभाग का स्पष्ट रूप से कहना है कि बैंक की बहुप्रतीक्षित बिक्री के लिए दूसरे दौर की बोली की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से तयशुदा नियमों के दायरे में रहकर कराई गई है तथा इसके आरक्षित मूल्य में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि कनाडा की प्रसिद्ध फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बैंक की लगभग इकसठ प्रतिशत हिस्सेदारी तरेपन हजार करोड़ रुपये में बेचने की योजना को गत चौदह अक्टूबर को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसके बाद से ही बैंक के मूल्यांकन और अपनाई गई प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे थे।
मूल्यांकन और दूसरे दौर की बोली पर उठे विवाद की असलियत
डीआईपीएएम द्वारा यह विस्तृत स्पष्टीकरण बैंक के वित्तीय मूल्यांकन और कनाडाई खरीदार कंपनी फेयरफैक्स द्वारा लगाई गई बोली की पारदर्शिता को लेकर विभिन्न बैंक यूनियनों और अन्य पक्षों द्वारा उठाए गए संदेहों के बाद सामने आया है। विभाग ने इस बात पर जोर दिया है कि दूसरे दौर की इस बोली के लिए जो भी कार्यप्रणाली अपनाई गई थी, उसे सचिवों के मुख्य समूह द्वारा विधिवत तय किया गया था। इस विशिष्ट समूह को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा सभी प्रकार के प्रक्रियागत मुद्दों और नियमों से जुड़े आवश्यक बदलावों पर निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार दिया गया था।
दूसरे दौर की प्रक्रिया की आवश्यकता और मूल्यांकन का तरीका
विभाग के अनुसार वित्त वर्ष के दौरान जब पहले दौर की बोलियां आमंत्रित की गईं, तब प्राप्त प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल सकी थी, जिसके कारण उस शुरुआती चरण का प्रभाव समाप्त हो गया था। चूंकि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई पूर्व निर्धारित आंतरिक प्रक्रिया नहीं थी, इसलिए सक्षम स्तर के अधिकारों के तहत दूसरे दौर के प्रस्ताव मांगने का मार्ग प्रशस्त किया गया। बैंक के उचित मूल्य का निर्धारण करने के लिए दो स्वतंत्र और प्रतिष्ठित सलाहकारों ने अलग-अलग विधियों का उपयोग किया। कारोबार के इस मूल्यांकन में बाजार की समान कंपनियों की कार्यशैली को आधार बनाया गया और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य सूचीबद्ध बैंकों की स्थिति का भी अध्ययन किया गया।
गोपनीयता के कड़े मानक और वित्तीय सौदे का पूरा गणित
डीआईपीएएम ने यह भी रेखांकित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि बोली लगाने वाली कंपनियों को स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों की आंतरिक रिपोर्टों की भनक तक न लगे, और दूसरी तरफ मूल्यांकन करने वालों को वित्तीय बोलियों की कोई जानकारी न हो। यह सभी जानकारियां केवल सचिवों के मुख्य समूह के पास सुरक्षित रखी गईं ताकि प्रस्तावों की निष्पक्षता बनी रहे। इस तरेपन हजार करोड़ रुपये के बड़े सौदे के तहत केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की संयुक्त हिस्सेदारी फेयरफैक्स को हस्तांतरित की जा रही है, जिसमें फेयरफैक्स द्वारा प्रति शेयर इक्यासी रुपये का भुगतान किया जाएगा, जबकि स्वतंत्र एजेंसियों ने इसका उचित मूल्य लगभग छियासी रुपये तय किया था। इसके अलावा कर संबंधी विवादों के लिए प्रावधान भी रखे गए हैं, और इस पूरी प्रक्रिया के चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय मंजूरियों के साथ पूर्ण होने की संभावना जताई गई है।


