पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी व्यापार शुल्कों (टैरिफ) के मंडराते संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी सुदृढ़ता का परिचय दिया है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अनुमान को पूर्व के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, एजेंसी ने सचेत किया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अल-नीनो के प्रभाव से मुद्रास्फीति (महंगाई) का खतरा अभी भी बना हुआ है।
निजी खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से आर्थिक विकास को गति
मूडीज के विश्लेषणात्मक आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष के प्रथम छह महीनों में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर बढ़कर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो बीते वर्ष दर्ज की गई 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी बेहतर है। इस आर्थिक उछाल में निजी खपत में मजबूती, सरकारी बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं पर सतत पूंजीगत व्यय और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन का प्रमुख योगदान रहा है। हालांकि, भारत की 'Baa3' रेटिंग की समीक्षा करते हुए मूडीज ने रेखांकित किया है कि देश पर कुल ऋण का बोझ और ब्याज अदायगी की ऊंची लागत अब भी एक बड़ा वित्तीय जोखिम बनी हुई है।
महंगाई दर में बढ़ोतरी का जोखिम
वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करते हुए रेटिंग एजेंसी ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया के संकट का शीघ्र स्थायी समाधान नहीं निकला, तो ऊर्जा संसाधनों के उच्च दाम चालू वित्त वर्ष में औसत वार्षिक महंगाई दर को अनुमानित 4.8 प्रतिशत के स्तर से ऊपर ले जा सकते हैं। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की 2.4 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर की तुलना में काफी अधिक होगा।
11 से 12 प्रतिशत की सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान
दूसरी ओर, वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म जेफरीज ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांतों को अत्यंत मजबूत बताया है। जेफरीज के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग, बैंकिंग ऋण में त्वरित वृद्धि और वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी के बल पर भारत चालू वित्त वर्ष के दौरान 11 से 12 प्रतिशत की सांकेतिक (नॉमिनल) जीडीपी वृद्धि दर दर्ज करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।


