अलवर सीएमएचओ कार्यालय में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने एक स्वर में गाकर देशभक्ति का संदेश दिया। डॉ. योगेंद्र शर्मा ने कहा – वंदे मातरम भारत की आत्मा और एकता का प्रतीक है।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
देशभर में “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रभक्ति की नई तरंग दौड़ रही है। इसी क्रम में मंगलवार सुबह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय, अलवर में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने एक स्वर में “वंदे मातरम” का सामूहिक गायन कर देशप्रेम और एकता का सशक्त संदेश दिया।
देशभक्ति से ओत-प्रोत रहा सीएमएचओ कार्यालय परिसर
सुबह का वातावरण जब “वंदे मातरम” के स्वरों से गूंज उठा, तो उपस्थित हर व्यक्ति के हृदय में गर्व और भावनाओं की लहर दौड़ गई। अधिकारी और कर्मचारी एक साथ खड़े होकर देश की आन-बान-शान के प्रतीक इस गीत को पूरी श्रद्धा से गा रहे थे। हर स्वर में देश के प्रति प्रेम और समर्पण झलक रहा था।
डॉ. योगेंद्र शर्मा बोले – वंदे मातरम भारत की आत्मा का प्रतीक
इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. योगेंद्र शर्मा ने कहा कि “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत माता की आत्मा और एकता का प्रतीक है। यह गीत हमें मातृभूमि के प्रति समर्पण, सम्मान और सेवा की प्रेरणा देता है।” उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में देश के करोड़ों लोगों के हृदय में आत्मबल और त्याग की भावना को जाग्रत किया था।
डॉ. शर्मा ने बताया कि “वंदे मातरम” शब्दों में निहित मातृभूमि के प्रति प्रेम, श्रद्धा और बलिदान की भावना आज भी हर भारतीय को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से कहा कि “हम सब स्वास्थ्य कर्मी हैं, और राष्ट्र सेवा का एक बड़ा हिस्सा अपने कार्य के माध्यम से निभा रहे हैं। यह गीत हमें और अधिक निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है।”w
स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका
इस अवसर पर कर्मचारियों को बताया गया कि “वंदे मातरम” गीत का सृजन 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने किया था। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया। यही गीत आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गया। क्रांतिकारियों के जोश, आंदोलनकारियों के नारों और स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज़ में यह गीत गूंजता रहा।
कई मौकों पर स्वतंत्रता सेनानियों ने इस गीत को अपनी प्रेरणा और शक्ति के स्रोत के रूप में स्वीकार किया। यह गीत उस समय एक नारे के रूप में लोगों के दिलों में बस गया — “वंदे मातरम” यानी “माँ, मैं तुझे प्रणाम करता हूँ।”
सीएमएचओ कार्यालय में गूंजा भारत माता की जय का नारा
वंदे मातरम के गायन के बाद पूरे कार्यालय में “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारे गूंज उठे। हर चेहरे पर देशभक्ति की चमक थी। कर्मचारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं, बल्कि हमें अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से निभाने की प्रेरणा भी देते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ कार्यालय परिसर में तिरंगे झंडे के नीचे सभी ने राष्ट्र एकता और जनसेवा का संकल्प लिया।
बाईट:
डॉ. योगेंद्र शर्मा, सीएमएचओ अलवर – “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, यह भारत की आत्मा है। यह हमें निष्ठा, सेवा और एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”


